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पुनरागमन

आज मुद्दत बाद मेरा गीत मेरे द्वार आया बात में उसकी कहीं कोई परायापन नहीं था और मेरी याद से भी थी नदारद हर शिक़ायत ठीक पहले सी सहजता थी हमारे बीच लेकिन आँख की इक कोर पर थी सहज होने की क़वायद आज ख़ुद से मैं उसे ख़ुद को छिपाते देख पाया आज से पहले उसे छूना हुआ सौ बार लेकिन आज...

चाँद को नहीं पता

कहीं भी तो अंतर नहीं है यार! चांद को नहीं पता कि उसे देखकर कोई रोज़ा, ईद की ख़ुशी में तब्दील होगा या कोई उपवास, महाशिवरात्रि के उल्लास का रूप धरेगा। गाय को भी नहीं पता कि उसके थनों में जो धार उतरी है, वो सेवइयों की मिठास में घुलेगी या शिवलिंग पर ढलक कर पावन होवेगी।...

मन की कविता

कविता मेरे अस्तित्व का आधार है। यदि मुझसे मेरी कविताओं को श्रेणीबद्ध करने को कहा जाए तो मैं अपनी तमाम रचनाओं को दो वर्गों में रखूंगा- एक ‘मंच की कविता’ और दूसरी ‘मन की कविता’। ‘मंच की कविता’ रोज़ रात को कवि-सम्मेलनों में तालियाँ और वाह-वाही लूटती फिरती है। लेकिन ‘मन की...

सनसनीबाज़ पत्रकार

छाप-छूप कर अख़बार एक सनसनीबाज़ पत्रकार रात तीन बजे घर आया तकिये में मुँह छुपाया और चादार तान के सो गया, इतनी देर में उसका अख़बार जनता के हवाले हो गया। इधर पत्रकार चैन से खर्राटे भर रहा था, उधर उसका अख़बार दुनिया की नाक में दम कर रहा था। दोपहर की पावन बेला में जब बिस्तर ने...

न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्ट्स

न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्ट्स देख कर लग रहा है कि मोदी जी ब्रिक्स राष्ट्रों से यही पूछने गए थे की दिल्ली में भाजपा की सरकार कैसे बनाई जाए! ✍️ चिराग़...
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