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इक पहेली हूँ

धूप में निखरोगे मेरी छाँव में जल जाओगे इक पहेली हूँ, कहाँ तुम ढूंढने हल जाओगे बर्फ़-सी ठंडक तो उसकी बात में होगी मगर छू लिया जिस पल उसे उस पल ही तुम जल जाओगे विषधरों के दंश का संकट भी झेलोगे ज़रूर जब कभी लेने किसी जंगल से संदल जाओगे धूप बनकर तुम दलानों में पसरते हो मगर...

आयात-निर्यात

जंगल के सभागार में बहुत बड़ा आयोजन हुआ जिसमें सर्वप्रथम भारत माँ के चित्र के सम्मुख दीप-प्रज्वलन और फिर मेंढ़क जी का स्वागत भाषण हुआ। भाषण में अजीव ‘प्वाइंट ऑफ व्यू’ था भाषण का सार कुछ यूँ था- “भैंसा दल के अध्यक्ष श्री कालूूप्रसाद जी! टबासीन मछलियो! रंग-बिरंगी...

भीमराव अंबेडकर

गुदड़ी के लाल ने दिखाया था कमाल देखो, सारी दुविधाओं का निदान ले के आया था परेशानी, दुख और ग़रीबी में जो जन्मा था, वही भारती का स्वाभिमान ले के आया था भारत की खोई आन-बान ले के आया; औ लोकतन्त्र वाला यश-गान ले के आया था भारती का एक अलबेला अनमोल पूत, भारत के लिए संविधान ले...
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