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हम तुम पार उतर जाएंगे

सुख होगा, उल्लास रहेगा
कभी-कभी कुछ त्रास रहेगा
जब सम्बन्ध निभेगा तो फिर
उसमें हर एहसास रहेगा
अच्छे-बुरे समय से हम-तुम, मिलकर साथ गुज़र जाएंगे
अपनेपन की नौका लेकर, इक दिन पार उतर जाएंगे

हम दोनों ने इस क़िस्से को मिलकर साथ सँवारा भी है
इक किरदार तुम्हारा भी है, इक किरदार हमारा भी है
अपना-अपना पात्र निभाकर, दोनों अपने घर जाएंगे

चाहे मुझसे रूठ भी जाना, कटु शब्दों के बान चलाना
लेकिन जब मैं तुम्हें मनाऊँ, तब तुम झटपट मान भी जाना
आँसू आए तो आँखों से फूल सरीख़े झर जाएंगे

उत्सव जैसा जीवन होगा, उत्सव का अवसान भी होगा
कभी-कभी सन्नाटा होगा, कभी-कभी तूफ़ान भी होगा
जो भी हो, हम साथ रहे तो सब व्यवधान बिखर जाएंगे

कुछ उम्मीदें भी टूटें तो, उसमें अपना साथ न टूटे
कैसी भी खींचातानी हो, इक-दूजे का हाथ न छूटे
बस इतना भर हो पाया तो, दिन ख़ुशियों से भर जाएंगे

✍️ चिराग़ जैन

अभय

मीत तुम चाहतों से डरा मत करो
चाह की जीत दिखलाउंगा एक दिन
मुक्त हो जाओगी तुम विवशताओं से
एक बंधन सजा जाउंगा एक दिन

तुम अगर कर सको तो यही बस करो
जब खुलें पंख तो रोकना मत उन्हें
जब कभी कामनाएँ तरल हो उठें
तो किसी लाज से सोखना मत उन्हें
रीत जाना नहीं, रीतियों की तरह
मैं नया रंग भर जाउंगा एक दिन

प्यार के नूर की बात करते सभी
प्यार का नूर सबको सुहाता नहीं
हम समझ ही नहीं पा रहे हैं अभी
प्यार क्यों बेहिचक बोल पाता नहीं
ये नियम, झूठ की पैरवी हैं प्रिये
सत्य का रूप दिखलाउंगा एक दिन

देह ने विष पिया, आत्मा ने नहीं
तुम मुझे देह अपनी नहीं सौंपना
जिन रिवाज़ों दूभर हुई ज़िन्दगी
सोच में तुम उन्हें बस नहीं रोपना
उम्र भर की छुअन भूल ही जाओगी
उंगलियों में समा जाउंगा एक दिन

✍️ चिराग़ जैन

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