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प्रह्लाद जीवित है

हार भी है, जीत भी है पीर भी है, प्रीत भी है अनवरत इक शोर भी है आपदा घनघोर भी है किन्तु अन्तस् में अमर आह्लाद जीवित है होलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित है मानता हूँ उत्सवों का दौर थोड़ा कम हुआ है आंधियों से आम्रवन का बौर थोड़ा कम हुआ है किन्तु कलरव ने चहकने की प्रथा...

शिखरों का निर्माण

सिद्धांतों की बलिवेदी पर, अपनापन बलिदान हुआ है पीड़ा भोगी और किसी ने, कोई और महान हुआ है लंका हो या अवधपुरी हो, सब ही ने ली अग्निपरीक्षा धोबी के आक्षेपों की भी, मन में कर ली स्वयं समीक्षा नष्ट सभी ने सीताओं का, सारा सुख-सौभाग किया है रावण ने अपहरण किया था, राघव ने...
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