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ज़िन्दगी

दुनिया में आ के सकुचाई पल भर फिर ममता की छाँव में सँवर गई ज़िन्दगी पालना, खिलौना, पाठशाला, अनुभव, ज्ञान प्रेम की छुअन से निखर गई ज़िन्दगी क़ामयाबी का गुमान ज़िन्दगी पे लदा और ज़िन्दगी के दाता को अखर गई ज़िन्दगी मौत की हवा ने श्वास का दीया बुझा दिया तो हाड़-हाड़ राख...

लव इन दिल्ली-यूनिवर्सिटी

मौरिस नगर के नुक्कड़ों को आज भी याद हैं हज़ारों निशब्द प्रेम कहानियाँ जिनका पूरा सफ़र तय होकर रह गया आँखों-आँखों में ही। लेकिन अब ये प्रेम कहानियाँ ऐसी ख़ामोशी से नहीं बनतीं। अब दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ लिखकर अपने अधिकार जान गया है प्रेम। अब लोक-लाज और पिछड़े हुए समाज से...

ऐब्स्ट्रेक्ट

किसी की याद के कुछ रंग यक-ब-यक बिखर जाते हैं ज़ेहन के कॅनवास पर। और मैं ठहर कर निहारने लगता हूँ उस कलाकृति की ख़ूबसूरती को। बूझने लगता हूँ अतीत के स्ट्रोक्स की जटिल पहेलियाँ। आज तक समझ नहीं पाया हूँ कि ये ऐब्स्ट्रेक्ट बना तो बना कैसे? ✍️ चिराग़...

दिल्ली

वे भी दिन थे जब पुरानी दिल्ली की तंग गलियाँ अकारण ही मुस्कुरा देती थीं नज़र मिलने पर अजनबियों से भी। दरियागंज की हवेलियाँ अक्सर देखा करती थीं एक कटोरी को देहरी लांघकर इतराते हुए दूसरी देहरी तक जाते कुछ दशक पहले तक। शाहदरा के बेतरबीब मकान चिलचिलाती धूप में अक्सर दरवाज़ा...
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