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गिद्धों में मुठभेड़ हुई है

नभ तक वीराना पसरा है हर मन में गहमागहमी है गिद्धों में मुठभेड़ हुई है पर चिड़िया सहमी-सहमी है सबके मुँह पर ख़ून पुता है, नाखूनों में मांस भरा है पर भोली चिड़िया के भीतर, दहशत का एहसास भरा है इसने उसकी चिड़िया मारी, उसने इसकी चिड़िया खाई खूब लड़े फिर समझौतों में,...

वर्तमान गवाह है…

जिन्होंने यह कहना शुरू किया कि इस्लाम ख़तरे में है, उन्हीं के नुमाइंदों ने अफगानिस्तान पर जबरन कब्ज़ा कर लिया। यूएनओ में स्थायी सदस्यता की डींगें हाँकनेवाले देशों के लिए यह शर्मिंदगी भरी लानत है। सबसे उम्दा हथियार बनानेवाले देशों के लिए यह डूब मरने की बात है।...

ग़रीबी

रुके आँसू, दबी चीखें, बंधी मुट्ठी, भिंचे जबड़े इन्हीं के तर्जुमे से मुल्क़ में विस्फोट होता है ये बम रखने का काम अच्छा-बुरा औरों की ख़ातिर है ग़रीबी के लिए तो सिर्फ़ सौ का नोट होता है ✍️ चिराग़...

मीडिया : एक चेहरा ये भी

हमारे मुल्क़ की क़िस्मत में ये विस्फोट क्यूँकर था शहर से गाँव तक माहौल कल दमघोट क्यूँकर था पसीना चू रहा था सबकी पेशानी से पर फिर भी ख़बर पढ़ते हुए उनके बदन पर कोट क्यूँकर था ✍️ चिराग़...

मुल्क़ में दहशत

जो फैलाने चले हैं मुल्क़ में दहशत धमाकों से वही छुपते फिरा करते हैं इक मुद्दत धमाकों से न ख़बरों में उछाल आया, न बाज़ारों में सूनापन न बिगड़ी मुल्क़ के माहौल की सेहत धमाकों से वही हल्ला, वही चीखें, वही ग़ुस्सा, वही नफ़रत हमें अब हो गई इस शोर की आदत, धमाकों से ये दहशतग़र्द अब...
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