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दिल टूट गया

आस का दामन छूट गया लगा मुक़द्दर फूट गया फिर से पलकें भीग गईं लो फिर से दिल टूट गया पहले भी कई बार हुआ मन में ग़ज़ब ख़ुमार हुआ नैनों में सपने उभरे और ये दिल लाचार हुआ अब फिर वही कहानी है हालत वही पुरानी है अमृत पीना चाहा तो भीतर कड़वा घूंट गया प्यार हुआ तो पीर मिली सबको ये...

सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम्

प्रेम में प्राप्ति की जब चली बात तो पीर सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम् हो गई दर्द सहने की ताक़त बची है मगर दर्द कहने की ख़्वाहिश ख़तम हो गई वेदना प्राण में कुलबुलाती रही देह व्यापार में ही फँसी रह गई एक लावा रगों में पिघलता रहा होंठ पर शेष सूखी हँसी रह गई भीड़ में बेसबब मुस्कुराना...

अब तो ख़ुश हो!

जिस सपने से डर लगता था उसको ही साकार कर लिया लो मैंने स्वीकार कर लिया अब तो ख़ुश हो…! मैं कहता हूँ- ‘तुम चाहो तो अब भी परिवर्तन संभव है स्थितियों का अपने हित में फिर से संयोजन संभव है’ तुम कहती हो- ‘छोड़ो भी अब, सारा सोच-विचार कर लिया’ लो मैंने स्वीकार कर लिया अब...
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