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विजय का मंत्र

जो समर्पित हो गया मजबूर होकर वह तुम्हारा हित करेगा; भूल जाओ जो न अपने मन मुताबिक जी रहा हो वह तुम्हारे हित मरेगा; भूल जाओ कर्ण इक एहसान के वश में विवश थे द्रोण इक प्रतिशोध के कारण खड़े थे शल्य इक षड्यंत्र से आहत हुए थे भीष्म इक प्रण की विवशता में लड़े थे मन बचा पाया...

शबरी

नित्य सजाती रही अंगना, प्रभु राम के दर्श की आस में शबरी आस की ऐसी निशंक तपस्या से दर्ज हुई इतिहास में शबरी सीता वियोग से व्याकुल थे, तब घुल गयी राम की प्यास में शबरी राम को भक्ति का स्वाद चखा गयी बेर की जूठी मिठास में शबरी ✍️ चिराग़...

अहल्या

साँस न थी पर आस की डोर पे जीवित थी दुखियारी अहल्या शाप के ताप को, स्वर्ग के पाप को झेल रही थी बेचारी अहल्या देखने में बस पाहन थी, मन में धरती से थी भारी अहल्या देखो शिला में भी प्राण बहे जब राम ने छूकर तारी अहल्या ✍️ चिराग़...

कोविड डायरी

अगर नल और नील सेतु-निर्माण में क्रेडिट-गेम खेलते रहे, तो सीता माता की प्रतीक्षा पथरा जाएगी! जब सारी सेना थक जाये तब भी तलवार न छोड़नेवाला योद्धा ही याद रखा जाता है! ✍️ चिराग़...

हम तुम पार उतर जाएंगे

सुख होगा, उल्लास रहेगा कभी-कभी कुछ त्रास रहेगा जब सम्बन्ध निभेगा तो फिर उसमें हर एहसास रहेगा अच्छे-बुरे समय से हम-तुम, मिलकर साथ गुज़र जाएंगे अपनेपन की नौका लेकर, इक दिन पार उतर जाएंगे हम दोनों ने इस क़िस्से को मिलकर साथ सँवारा भी है इक किरदार तुम्हारा भी है, इक किरदार...
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