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करवाचौथ

देख-देख कर सोचता, चाँद धरा से दूर। आज छतों पर आ गया, सारे जग का नूर।। करवे से जब अर्घ्य का, निभने लगा रिवाज़। चन्द्रलोक तक बज उठा, जलतरंग सा साज।। ✍️ चिराग़...
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