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रावण

यदि अब राम की शरण में चला गया; तो मुझे मेरे भीतर का पाप मार डालेगा एकमात्र सधवा बचेगी मेरी पत्नी तो शेष विधवाओं का विलाप मार डालेगा जिनसे सुशोभित थी रावण की राजसभा उन रिक्त आसनों का शाप मार डालेगा मृत्यु जो करेगी वह जग को दिखायी देगा जीवन तो मुझे चुपचाप मार डालेगा जिस...

अयोध्या

शोभ रही नगरी सरयू-तट, खोज रहे उपमा तुलसी नील सरोवर में दमके, जिस भाँति कली इक रातुल-सी मानस-मानस राम बिराजत, आंगन-आंगन माँ तुलसी या नगरी वरनैं न थके, क्या तो आदिकवि, अरु क्या तुलसी ✍️ चिराग़...
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