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हादसा थी ज़िन्दगी

हादसा थी ज़िन्दगी, होता रहा जो उम्र भर दौलते-लमहात थी, खोता रहा जो उम्र भर कौन समझे उसके अश्क़ों की ढलकती दास्तां बस दरख़तों से लिपट, रोता रहा जो उम्र भर अब तो कलियों से भी उसकी पीठ क़तराने लगी पत्थरों को गुल समझ ढोता रहा जो उम्र भर इक न इक दिन उसका घर अश्क़ों में डूबेगा...

गीत गढ़ने का हुनर

मसख़रों की मसख़री अपनी जगह शायरों की शायरी अपनी जगह गीत गढ़ने का हुनर कुछ और है मंच की बाज़ीगरी अपनी जगह ✍️ चिराग़...

अंदाज़ा न कर

पीर की ज़द का अंदाज़ा न कर कल की आफ़त का अंदाज़ा न कर ज़ख़्म गहरा है दर्द होगा ही अब रियायत का अंदाज़ा न कर वक़्त पर ख़ुद-ब-ख़ुद पनपती है यूँ ही हिम्मत का अंदाज़ा न कर बीज में पेड़ छिपा होता है क़द से ताक़त का अंदाज़ा न कर सिर्फ़ दो दिन की मुलाक़ातों से उनकी आदत का अंदाज़ा न कर हँस...
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