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अंजाम वहशतों का

तुम पीटते ढिंढोरा, गर बात हो ज़रा सी कैसे किए भला फिर हैरान देशवासी बोलो जनाब इसमें क्या चाल थी सियासी चुपचाप क्यों चढ़ाया तुमने कसाब फांसी पर तक न मार पाया, उस पल वहाँ परिंदा मरते ही आपने जब दफ़ना दिया दरिंदा जनता को भी दिखाते अंजाम वहशतों का मर कर तो हो न जाता फिर से...

बपौती

साफ़-साफ़ बात सुन लो जी ये दुनिया हम मर्दों की बपौती है इसमें रहना है तो रहना ही होगा हमारी शर्तों पर। हमने कई तरह से चाहा तुम्हें कहना लेकिन तुम हो कि सुनती ही नहीं हो हमने नियम बनाए ताकि तुम समझ सको अपनी सीमाएँ! हमने बातें बनाईं ताकि तुम डर सको बदनामी से! हमने प्रथाएँ...

बाज़ार की अफ़वाह और अफ़वाह का बाज़ार

दीवाली, दशहरा, रक्षाबंधन ये सब हमारे लिए त्यौहार हैं लेकिन कुछ लोगों के लिए सिर्फ व्यापार हैं हर साल की तरह इस साल भी दीवाली आई, इस साल भी हुआ लक्ष्मी जी का पूजन आतिशबाज़ी और घरों की सफ़ाई, लेकिन इस साल हमने मिठाई नहीं खाई। बचपन में इतनी मिठाई आती थी इतनी मिठाई आती थी...
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