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मरासिम

यार दहशत से समर्पन नहीं जीता जाता रूप मिल सकता है, यौवन नहीं जीता जाता क्या मरासिम की रवायत में कोई ख़ामी है तन लिवा लाते हैं पर मन नहीं जीता जाता एक झोंके की छुअन से ही बरस जाता है आंधियो! शोर से सावन नहीं जीता जाता सामने वाले के एहसास पे हारो ख़ुद को प्यार का खेल...
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