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मर्यादा

मैंने एक गोला बनाया और फिर उसे चार हिस्सों में बाँट दिया तभी किसी ने कहा- “इन चारों हिस्सों में अलग-अलग रंग भरो” …तब मुझे अहसास हुआ कि नए रंग का अपनी मर्यादा में रहना तभी संभव है जब पुराना रंग अपनी सीमाओं में पूरी तरह जम जाए! ✍️ चिराग़...

बेग़ुनाही का दावा

कोई महज ईमान का जज्बा लिए जिया कोई फ़रेब-ओ-झूठ का मलबा लिए जिया टूटन, घुटन, ग़ुबार, अदावत, सफ़ाइयाँ इक शख्स सच के नाम पे क्या-क्या लिए जिया जब तक मुझे ग़ुनाह का मौक़ा न था नसीब तब तक मैं बेग़ुनाही का दावा लिए जिया था बेलिबास अपनी नज़र में हर एक शख्स दुनिया के दिखावे को लबादा...
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