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मुफ्तख़ोरी

हर बार इन्हें मुफ्त के सपने न दिखा तू इक बाद बदल डाल ये किस्मत का लिखा तू ये मुफ्तख़ोरी देश को बर्बाद न कर दे ऐ राजनीति इनको कमाना भी सिखा तू ✍️ चिराग़...

लूट का तंत्र न तोड़ो साहिब

दिल्ली के ऑटो-टैक्सी वालों ने सरकार को बताया है कि हम जो सदियों से जनता को लूटते रहे हैं, मीटर से चलने से इनकार करते रहे हैं, तीन-चार गुना से लेकर दस-बारह गुना तक किराया मांगते रहे हैं, मीटर से चलने की मांग करने वालों को गाली बकते रहे हैं, पुलिस का डर दिखाने वालों की...

ऐसा संवत्सर आया है

ऐसा संवत्सर आया है बूढ़ा अमुवा बौराया है छोटी छोटी कैरी आई झड़बेरी पर बेरी आई शहतूतों का रंग लाल हुआ सहजण का पेड़ कमाल हुआ गेंदा फूला, गुडहल फूला चिड़ियों ने फिर झूला झूला पीपल पर कोंपल नई नई पिलखन पर चिड़िया कई कई नम हुए सूखते हुए सोत झूमे तोते, झूमे कपोत ककड़ी का हरियाला...

एकाकी

सिर्फ दिखावे भर के सारे उत्सव मेले हैं सब अपने-अपने जीवन में निपट अकेले हैं अपनेपन का नाम सुना है, शक्ल नहीं देखी रिश्तों पर मिटने वालों की नस्ल नहीं देखी बाहर से ख़ुश हैं पर भीतर बहुत झमेले हैं वैभवशाली दिखने की इक होड़ लगी है रे जर्जरता भी बाहर से बेजोड़ लगी है रे हीरे...

खूबसूरत ज़िन्दगी का दर्दनाक अंत

सफलता के पथ पर एक प्रेत रहता है, जिसका नाम है अवसाद। इसकी पकड़ बहुत मज़बूत है। मुस्कुराहटों और खिलखिलाहटों की महफ़िल से छिटक कर अचानक एकाकी हो गए लोगों पर यह सामने से हमला करता है। सफलता के पथ का पथिक जब व्यावसायिक सफलता और व्यक्तिगत चुनौतियों के बीच झूल रहा होता है तब न...
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