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होली

बेतरतीबी से लगाया जाये तो गुलाबी रंग से भी आदमी पागल हो जाता है और सलीके से लगाया जाये तो काला रंग भी काजल हो जाता है। ✍️ चिराग़...

गुमान के असर से बचा

चलो किसी तरह मैं मुश्क़िले-सफ़र से बचा ख़ुदा मुझे तू अब गुमान के असर से बचा इन आइनों के सामने से ज़रा बच के निकल तू अपने आप को ख़ुद अपनी भी नज़र से बचा अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे तो अपने मुल्क़ को इस आग की ख़बर से बचा ये दुनिया हर किसी पे उंगलियाँ उठाती है तू अपनी सोच को...

मर्यादा

न हों हदों में तो छाले रिसाव देते हैं किनारे धार को बाढब बहाव देते हैं हदों में हैं तो ख़ैर-ख्वाह हैं उंगलियों के हदों को लांघ के नाखून घाव देते हैं ✍️ चिराग़...

आदमी यकसा मिला

हर कोई ख़ुद को यहाँ कुछ ख़ास बतलाता मिला हर किसी में ढूंढने पर आदमी यकसा मिला आज के इस दौर में आदाब की क़ीमत कहाँ वो क़लंदर हो गया जो सबको ठुकराता मिला हर दफ़ा इक बेक़रारी उनसे मिलने की रही हर दफ़ा ऐसा लगा, इस बार भी बेज़ा मिला जिसने उम्मीदें रखीं और क़ोशिशें हरगिज़ न कीं उसको...
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