+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

आँसू की आवाज़

जो रैली में पींग बढ़ाते नारों की हालत देखो जाकर उन बेचारों की इंसानों की बस्ती भूखी बैठी है तुम बातें करते हो चाँद-सितारों की आँसू की आवाज़ छुपाकर रख पाएँ इतनी भी औक़ात कहाँ दीवारों की लहरों से कश्ती का हाथ छुड़ाना है हिम्मत बढ़ती जाती है पतवारों की सिगरेट को इक बार...

ईद

ईद के चांद अगर हो तो बस इतना कर दे फिर से इस मुल्क के लहजे में मिठास आ जाए ✍️ चिराग़ जैन

चिराग़ों के घर नहीं होते

सदा तो सँग तलक दर-ब-दर नहीं होते कहा ये किसने चिराग़ों के घर नहीं होते अभी असर न दिखा हो तो इंतज़ार करो हैं ऐसे दांव भी जो बेअसर नहीं होते ग़मों की धूप में नाज़ुक बदन मुफ़ीद नहीं गुलों के जिस्म नरम, सूखकर नहीं होते खुद अपना बोझ उठाने में कोई हर्ज़ नहीं पराये पाँव बहुत...

लम्हों का अक्स

न जाने कितने ही लम्हों का अक्स है इसमें ये मेरी शक़्ल एक दौर की झलक भर है ✍️ चिराग़ जैन

नसीब करवट बदल रहा है

कोई हमारे नसीब को इक नयी कहानी सुना रहा है हथेलियों पर कई लकीरें बना रहा है, मिटा रहा है बहुत दिनों से जिस एक खिड़की के पार किरणें न आ सकी थीं अब एक उम्मीद का परिंदा उसी के पल्ले हिला रहा है जिसे बचाने की कोशिशों में हरेक हसरत दबा ली हमने उसी अना को सलाम करके कहीं कोई...
error: Content is protected !!