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पायल की रुनझुन

हर एक मुहूरत का जग में सत्कार मुझी से सम्भव है बाक़ी सब कुछ सम्भव है पर परिवार मुझी से सम्भव है बर्तन की खनखन चौके में पायल की रुनझुन आंगन में मेरे होंठो पर सजती है गीतों की गुनगुन सावन में जीवन के सोलह सपनों का सिंगार मुझी से सम्भव है बाक़ी सब कुछ सम्भव है पर परिवार...
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