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प्रतीक्षा

ओ मथुरा के राजा सुन ले, वैभव से फुरसत पाए तो गोकुल की गलियों में अब भी फाग प्रतीक्षारत बैठा है दरबारों के जयकारों से जब भी मन उकता जाए तो राधा की पलकों में इक अनुराग प्रतीक्षारत बैठा है राजमहल का स्वांग रचाकर मन भर जावे तो आ जाना द्यूतभवन की घटना से जब जी घबरावे तो आ...
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