+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

सत्य

सत्य के लिए व्याकरण की नहीं अंतःकरण की आवश्यकता होती है। ✍️ चिराग़ जैन

लाचारी

उनको जाने क्या-क्या सहना पड़ता है ख़ुद से आँख चुराकर रहना पड़ता है हम तो केवल सच से काम चलाते हैं उनको थोड़ा झूठ भी कहना पड़ता है ✍️ चिराग़...

सादगी की डगर

सत्य का पथ हमें क्यों जटिल सा लगा उम्र को झूठ में ढाल कर चल दिए सादगी की सुहानी डगर छोड़ कर ज़िन्दगानी फटेहाल कर चल दिए जो रवैया हमें पीर देता रहा क्यों उसी के लिए हम पुरस्कृत हुए ज़िन्दगी पर चढ़े पाप के आवरण पाठ जितने पढ़े सब तिरस्कृत हुए प्रश्न तो आत्मा ने उठाए मगर हम...

सच के नाम पे

दुनिया की बदसलूक़ी का तोहफ़ा लिये जिया फिर भी मैं अपने सच का असासा लिये जिया कोई महज ईमान का जज्बा लिये जिया कोई फ़रेब-ओ-झूठ का मलबा लिये जिया टूटन, घुटन, ग़ुबार, अदावत, सफ़ाइयाँ इक शख़्स सच के नाम पे क्या-क्या लिये जिया जब तक मुझे ग़ुनाह का मौक़ा न था नसीब तब तक मैं बेग़ुनाही...

अपना-अपना शऊर था

सरे-बज़्म मैं रुसवा हुआ, यही दौर का दस्तूर था मैं ये बाज़ियाँ न समझ सका, मिरी सादगी का क़ुसूर था तूने ग़म में ख़ुशियाँ तबाह कीं, मैंने हँस के दर्द भुला दिये ये तो अपना-अपना रिवाज़ था, ये तो अपना-अपना शऊर था तुझे जिस्म से ही गरज़ रही, मिरा जिस्म तेरी हदों में था मिरी रूह...
error: Content is protected !!