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बदचलन लड़की बनाम मीडिया

किसी शहर में एक लड़की रहती थी। बहुत खुले विचारों की थी। उसको मुहल्ले का कोई भी लड़का फ़िल्म दिखाने, कॉफ़ी पिलाने, पार्क घुमाने, बाइक पर घुमाने, डिस्को ले जाने या डेट पर चलने का ऑफ़र देता, तो बिना किसी नखरे के मान जाती थी। धीरे-धीरे उसकी यह सहृदयता पूरे शहर में फ़ेमस हो गई। कभी-कभी बाहर के शहर के छोरे भी उसे आइसक्रीम खिलाने अपने साथ ले जाने लगे। अब उसका कोई भी दिन अकेले नहीं बीतता।

लेकिन आजकल उसकी हालत बहुत दयनीय हो गई है। स्थिति यह है कि पूरे शहर में जिस लड़के के साथ वो होती है, उसके अतिरिक्त बाक़ी पूरा शहर उसको बदचलन, आवारा, चरित्रहीन और कुल्टा कहता है। हाँ, जिस लड़के पर जिस समय कृपा बरस रही होती है, उसको वह बहुत मैच्योर, सिन्सियर और ओपेन माइंडिड लगती है। वो लड़का बाक़ी शहर भर के छोरों को मैनर्सलैस और इल्लिट्रेट मानता है। ये और बात है, बाद में यह छोरा भी मैनर्सलैस छोरों के साथ मिलकर उसे किसी और के साथ घूमते देख आवारा कहने से नहीं चूकता।

उस लड़की का नाम मीडिया है। इसके लिये हर छोरा एक दिन का दाना-पानी है। और छोरे अपनी-अपनी बारी के चक्कर में सब ज़रूरी काम छोड़ कर इसके चाल-चलन और रंग-ढंग से बिना बात प्रभावित हुए रहते हैं।

✍️ चिराग़ जैन

झूठ के दम पे मुहब्बत

सच के कारण मिली नफ़रत क़ुबूल है लेकिन
झूठ के दम पे मुहब्बत नहीं अच्छी लगती

यूँ तो रिश्ते मेरे दिल को सुक़ून देते हैं
पर ये रिश्तों की सियासत नहीं अच्छी लगती

भूख जिस वक़्त कलेजा गलाने लगती है
तब ख़ुदाओं की इबादत नहीं अच्छी लगती

उनको कल तक मेरा क़िरदार बहुत भाता था
अब मेरी एक भी आदत नहीं अच्छी लगती

कैसे इस दौर के बच्चों को दुआ दे कोई
इनको पुरख़ों की नसीहत नहीं अच्छी लगती

काम जिस शख़्स का चलता हो बेइमानी से
उसको दुनिया में शराफ़त नहीं अच्छी लगती

क़ायदा जिसने मुहब्बत का पढ़ लिया हो चिराग़
उनको फिर कोई शरीयत नहीं अच्छी लगती

✍️ चिराग़ जैन

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