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बदचलन लड़की बनाम मीडिया

किसी शहर में एक लड़की रहती थी। बहुत खुले विचारों की थी। उसको मुहल्ले का कोई भी लड़का फ़िल्म दिखाने, कॉफ़ी पिलाने, पार्क घुमाने, बाइक पर घुमाने, डिस्को ले जाने या डेट पर चलने का ऑफ़र देता, तो बिना किसी नखरे के मान जाती थी। धीरे-धीरे उसकी यह सहृदयता पूरे शहर में फ़ेमस हो गई।...

झूठ के दम पे मुहब्बत

सच के कारण मिली नफ़रत क़ुबूल है लेकिन झूठ के दम पे मुहब्बत नहीं अच्छी लगती यूँ तो रिश्ते मेरे दिल को सुक़ून देते हैं पर ये रिश्तों की सियासत नहीं अच्छी लगती भूख जिस वक़्त कलेजा गलाने लगती है तब ख़ुदाओं की इबादत नहीं अच्छी लगती उनको कल तक मेरा क़िरदार बहुत भाता था अब मेरी...

मुख़्बिर

उफ़ ये मुई सपनों की रोशनी पलकें बंद हैं पर चमक उठा है चेहरा। ✍️ चिराग़ जैन
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