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चिराग़ों के घर नहीं होते

सदा तो सँग तलक दर-ब-दर नहीं होते कहा ये किसने चिराग़ों के घर नहीं होते अभी असर न दिखा हो तो इंतज़ार करो हैं ऐसे दांव भी जो बेअसर नहीं होते ग़मों की धूप में नाज़ुक बदन मुफ़ीद नहीं गुलों के जिस्म नरम, सूखकर नहीं होते खुद अपना बोझ उठाने में कोई हर्ज़ नहीं पराये पाँव बहुत...

नए घर में

नए फ्लैट की दीवारों पर धीरे-धीरे उभर रहा है हमारा घर माॅड्यूलर किचन के खोपचों से आँख बचाकर एक कोने में पालथी मारकर बैठ गया है सरसों के तेल का पीपा सभी नए कंटेनरों के बीच चुपके से जा छुपी है युगों पुरानी हींग की डिब्बी! बरसों से इकट्ठे हुए शो-पीस चहक कर जा बैठे हैं...

परिस्थितियों की खिल्ली

हम अक्सर राजनीति से नाराज़ रहते हैं कि राजनीति असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए फालतू के विवादों में क्यों उलझाती है; हमें स्वयं से भी यह प्रश्न पूछना चाहिए कि हम भी वास्तविक विषयों से भटककर फालतू विवादों में क्यों उलझते हैं। राहुल गांधी गुरुद्वारे गए, मोदी जी...
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