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पीर के गाँव

प्रेम की राह में पीर के गाँव हैं प्रेम फिर भी हमेशा लुभावन हुआ एक सावन बिना प्रेम पतझर बना पतझरों ने छुआ प्रेम; सावन हुआ जब नदी ने समुन्दर छुआ झूम कर तब नदी की सुधा को निचोड़ा गया अपहरण कर लिया सूर्य ने देह का और बादल उसे ओढ़ बौरा गया हिमशिखर में ढली, आँसुओं-सी गली छू...

अच्छे दिन आनेवाले हैं

“अच्छे दिन आनेवाले हैं” का पर्यायवाची वाक्य आज मथुरा में गूँजा “बुरे दिन चले गए हैं। अब कहीं विपक्षी ये न कह दें कि “देख लो जी; आया कुछ भी नहीं, जो था वो भी चला गया।” ✍️ चिराग़...

पुत्री के जन्म पर

इक किरण सूर्य की आई हो जैसे धरती के प्रांगण में वैसे ही आई है बिटिया मेरे मुस्काते जीवन में उसके आ जाने से मेरी मुस्कानों ने मआनी पाए उसको गोदी में ले चूमा तो अन्तस् ने उत्सव गाए शब्दों को ख़ूब निचोड़ लिया फिर भी यह गान अधूरा है बिटिया के जन्मोत्सव के इस सुख का अनुमान...

पेट्रोल के दाम

राहुल गांधी से किसी ने पूछा : सरकार ने पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए, इस पर आपकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई? राहुल गांधी : आपको क्या लगता है कि मैं पदयात्रा किसानों के लिए कर रहा हूँ? ✍️ चिराग़...

ज़रा से तार में ख़ुशियाँ पिरोना

निभाना, सहन करना, बाट जोहना सीख लेती थीं बिना आवाज़ के छुप-छुप के रोना सीख लेती थीं कहाँ ग़ुम हो गईं वो पीढ़ियाँ जब बेटियाँ माँ से ज़रा से तार में ख़ुशियाँ पिरोना सीख लेती थीं ✍️ चिराग़...
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