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सादगी

आधा मन लेकर विभीषण बनोगे ज्यादा मन लेकर रावण बनोगे सादा मन लेकर राम बन जाओगे ✍️ चिराग़ जैन

सीता को संभालो

रावण घर में नहीं घुसता, वो सीता को ही बाहर बुलाता है। ✍️ चिराग़ जैन

परिपक्व

परिपक्वता एक सिद्धि है जो थोड़े नैष्ठुर्य, थोड़ी कायरता और थोड़ी निर्लज्जता की साधना से प्राप्त होती है। ✍️ चिराग़...

विकास

अध्यापक: विकास का पागल होना क्या होता है? छात्र: जब Plant लगाने के लिए Tree काटे जाएं, तो इसे विकास का पागल होना कहते हैं। ✍️ चिराग़...

सदुपयोग

कमाने में इतने व्यस्त न हो जाना कि ख़र्चने के लिए समय ही न बचे। क्योंकि अपनी ज़िन्दगी के मालिक आप ख़र्चते समय होते हैं; कमाते समय तो श्रमिक होते हैं। ✍️ चिराग़...

अहंकार

स्वाभिमान जब दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करने लगे, तब वह कोरा अभिमान बनकर रह जाता है। ✍️ चिराग़...
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