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सरकार चल रही है

जो ख़ास हैं उन्हीं की अब दाल गल रही है और आम आदमी की टोपी उछल रही है सब चोर हैं सदन में- अख़बार बोलता है फिर भी ग़ज़ब है उनकी, सरकार चल रही है ✍️ चिराग़...

आपसे बात जब नहीं होती

अपनी बातों में कुछ नया भी नहीं और कुछ ख़ास मुद्दआ भी नहीं आपसे बात जब नहीं होती ऐसा लगता है दिन गया भी नहीं ✍️ चिराग़...

मेला बरसात में

उठ जा रे देख सुबह से बरस रहा है रामजी। ….बेमौसम ….झमाझम। मुझे चिंता हुई रामलीलाओं का क्या होगा? और अधबने रावण के पुतले… …वो तो भीग गए होंगे। देखने गया तो पाया सब कुछ भीग गया था रामलीला का मंच रावण का दरबार ऋष्यमूक पर्वत दंडक वन पर्णकुटी पुष्पक...
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