+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

परोक्ष

किसी का क़द ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं किसी का पद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं कहाँ गहराई है किसकी यही सबको नहीं दिखता कोई बरगद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं ✍️ चिराग़...

उम्मीद

उम्मीद टूट जाये तो पीड़ा …संत्रास! और बंधी रहे तो टूट जाने की आशंका। ✍️ चिराग़...

इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...
error: Content is protected !!