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स्वार्थी कायरता

हम सब बहुत तेज़ी से भीड़ में अकेले होते जा रहे हैं। एक सिंह सैंकड़ों हिरणों के बीच से एक हिरण को उठा लाता है, क्योंकि सिंह आश्वस्त होता है कि आक्रमण के समय झुण्ड का प्रत्येक हिरण एकाकी हो जाएगा। यदि झुण्ड के आठ-दस हिरण भी संगठित होकर सिंह पर धावा बोल दें तो कोई नाहर...

ऊर्जा का सदुपयोग

जिस समय नल और नील समुद्र की लहरों को बांधकर सेतुनिर्माण कर रहे थे, उस समय रावण “भालू-बन्दरों की भीड़” कहकर रामदल का उपहास कर रहा था। यदि नल-नील ने उस उपहास का उत्तर देने में ऊर्जा निवेश की होती तो राम की सेना कभी सागर पार नहीं कर पाती। ✍️ चिराग़...

बोनसाई

आदेशों का दास नहीं है शाखा का आकार कभी ले तक सीमित मत करना पौधे का संसार कभी जड़ के पाँव नहीं पसरे तो, छाँव कहाँ से पाओगे जिस पर पंछी घर कर लें वो ठाँव कहाँ से लाओगे बालकनी में बंध पाया क्या, बरगद का विस्तार कभी कोंपल, बूटे, कलियाँ, डाली; ये सब कुछ आबाद रहे तब ही आती...

बुनियादों की मज़बूती

धूप, कंगूरों की रंगत को चाट गई जब धीरे-धीरे तब बुनियादों की मज़बूती दीवारों के काम आ गई होठों पर ताले लटके थे, संवादों पर बर्फ़ जमी थी आखर-आखर आतंकित था, हर आहट सहमी-सहमी थी सबके अपने-अपने सुख थे, सबके अपने-अपने कमरे तब छोटी-सी एक मुसीबत, परिवारों के काम आ गई फिर...
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