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आसरा

लड़खड़ाकर गिरे नहीं होते गर तेरे आसरे नहीं होते कमनसीबी का दौर है वरना हम भी इतने बुरे नहीं होते ✍️ चिराग़...

दर्द की दास्तान

दर्द की दास्तान सुन लेना ख़ुद-ब-ख़ुद साहिबान सुन लेना होंठ मेरे न कुछ कहेंगे मगर आँसुओं का बयान सुन लेना ✍️ चिराग़...

अहसास

तुम छोड़ जाओगे- ये अहसास खल रहा है सीने में दर्द का इक लावा पिघल रहा है कुछ इस तरह से हर इक लम्हा निकल रहा है हाथों से जैसे कोई रेशम फिसल रहा है ✍️ चिराग़...

परिवर्तन

जब से हम करने लगे बात-बात में जंग तब से फीके पड़ गए त्यौहारों के रंग धुआँ-धुआँ सा रह गया दीपों का त्यौहार शोर-शराबा बन गया होली का हुड़दंग ✍️ चिराग़...
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