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सत्य

सत्य के लिए व्याकरण की नहीं अंतःकरण की आवश्यकता होती है। ✍️ चिराग़ जैन

नवरात्रि और स्त्री

चैत्र मास की नवरात्रि मनुष्य जाति में प्रचलित सर्वाधिक विशेष उत्सवों में एक हैं। स्त्री मन की नौ अलग-अलग दशाओं की आराधना ही नहीं अपितु साधना तक की परंपरा का विधान है इस पर्व में। और थोड़ा सा ध्यान से देखें तो देवी के इन नौ रूपों में काव्य के नौ रस भी सहज ही दिखाई दे...

लम्हों का अक्स

न जाने कितने ही लम्हों का अक्स है इसमें ये मेरी शक़्ल एक दौर की झलक भर है ✍️ चिराग़ जैन

पतझर का मौसम

कई बार मैंने महसूस किया है कि पतझर का मौसम अन्य किसी भी मौसम से अधिक कवित्व भरा होता है। ऊँचे दरख्तों से सहसा झरते पीले पत्ते मन में अव्यक्त सी रूमानियत भर जाते हैं। डालियाँ थोड़ी खाली ज़रूर होती हैं लेकिन उन्हें बेनूर नहीं कहा जा सकता। झरते हुए पत्ते सड़कों का सिंगार...

कुर्सी की खुमारी

सबने भर भर के अपनी पिचकारी, विरोधियों पे मारी होली का चढ़ा रंग भाइयो! कहीं लाठी बजी है कहीं गारी, कहीं कुर्सी की खुमारी सभी का न्यारा ढंग भाइयो! बच्चन जी ने खूब कहा था मेल कराती मधुशाला पर सत्ता का कैसा-कैसा खेल कराती मधुशाला शिक्षामंत्री जैसों को भी फेल कराती मधुशाला...
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