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संतोष आनन्द जी के घर महाशोक

जीवन में कुछ क्षण ऐसे आते हैं, जब शब्द हिचकियों और सुबकियों में अनूदित होजाते हैं। आज संतोष आनंद जी को सुबकते हुए देखा तो उनके गीतों की जिजीविषा वहाँ व्याप्त सन्नाटे में लास्य करने लगी। इसी जिजीविषा की उंगली थामकर मृत्त्यु के सम्मुख निरुपाय खड़ा एक बुज़ुर्ग बाप कदाचित्...

प्रेम की तकनीकी चुनौतियां

यूरिया का ज़ोर, हर डाल कमज़ोर, अब चंपा की टहनिया पे लूम नहीं सकते एमएमएस बनने का डर लगा रहता है प्यार के नशे में अब झूम नहीं सकते प्यार के हज़ार दुश्मन हर मोड़ पे हैं एक-दूसरे के साथ घूम नहीं सकते और अब मुआ हैलमेट गले पड़ गया बाइक पे बैठ के भी चूम नहीं सकते ✍️ चिराग़...

अंजुरी

तुमसे मिलते ही बह निकलती हो कविता -ऐसा नहीं है। न तो मोम है कविता न ही आग हो तुम। तुम तो अंजुरी हो छपाक से भर जाती हो कविता में डूबकर! ✍️ चिराग़...

संक्रमण काल

चौपालों पे कितने ठहाके गूंजा करते थे आज अधरों पे मुस्कान भी नहीं रही कभी स्वाभिमान तलवारों से दमकता था आज तलवार छोड़ो, म्यान भी नहीं रही पेड़ों से घरों की पहचान थी कभी पर अब पेड़ भी नहीं हैं पहचान भी नहीं रही नारियों के हाथ में भी आई न व्यवस्था और हद ये है पुरुष प्रधान...

चौरकर्म

फेसबुक के प्रयोक्ताओं को रोज़ कुछ अच्छा स्टेटस डालने का शौक तो चर्रा गया है, लेकिन इसके साथ अपनी सृजनात्मक क्षमता बढ़ाने की ललक नहीं जगी। ऐसे में दूसरों की प्रोफाइल से स्टेटस या स्टेटसांश कॉपी करके अपनी timeline पर पेस्ट करने की प्रवृत्ति बढ़ गयी है। इसमें कोई बुराई तो...
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