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उर्दू और भारत

अगर भाषाओं से धर्म की पहचान होती तो हिन्दी के पास रसखान और रहीम नहीं होते तथा उर्दू के पास फ़िराक़ और गुलज़ार नहीं होते। राजनीति को मुर्गे लड़ाने का चस्का हो, तो वह कहीं और जाए, भाषाएँ तो आश्रमों की संतति होती हैं। रामप्रसाद बिस्मिल और भगतसिंह की भाषा को पराया मानने...

गणपति : एक जीवनशैली

गणेश… बुद्धि के अधिपति। गणेश… रिद्धि-सिद्धि के स्वामी। गणेश… शुभ-लाभ के पिता। गणेश… संतोषी के जनक। भारतीय पौराणिक साहित्य में गणेश अद्वितीय हैं। गणेश जी को लेकर जो प्रतीक विधान गढ़ा गया है वह लक्षणा नहीं, विलक्षण है। पाराशर ऋषि के आश्रम को...

संविधान

धागेनातीनकगधिंन ताल चलती है, पर सुर सारेगामापाधानीसा में समाय के नूपुर छनन छन, घनन घनन घण्ट; मृदंग बजत द्रुम द्रुम द्रुम गाय के पंचम-निषाद तीव्र-कोमल से रंगे राग, दुगुन-तिगुन ताल भेद समझाय के विलग विलग स्वर गान बनते हैं, जब सब एकरूप होते सम पर आय के कभी सब त्याग...

खोते मंज़र

चाहकर भी नहीं बचा पा रहे हैं हम वह सब जो आनंदित करता है हमें तनाव के क्षणों में। क्षमा नहीं करेंगी हमें हमारी ही सन्तानें क्योंकि छीन लेते हैं हम रोज़ाना आनंद के अनिवार्य तत्व अगली पीढ़ी से …आधुनिक बनने की कोशिश में मिटा देते हैं रोज़ाना प्रकृति में बिखरे काव्यांश...
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