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कान्हा की उंगली पर गौवर्द्धन

जिनकी कविताएँ पढ़कर मन प्रसन्न हो जाता है, उन सब युवाओं की पिछले दो-तीन दिन की क़वायद ने बुझती हुई आँखों में नयी रौशनी भर दी है। दिन-रात लगकर ये सब अनजान लोगों की मदद के लिये सबके आगे हाथ फैला रहे हैं। न खाने का होश है न पीने की चिंता। बस यहाँ ऑक्सीजन, वहाँ इंजेक्शन,...

पुल बनाओ तो सही

पुल बनाओ तो सही इस फ़ासले के सामने मुश्क़िलें ख़ुद हल बनेंगीं मसअले के सामने आंधियाँ राहों में बिछ जाएंगीं सजदे के लिए आसमां छोटा पड़ेगा हौसले के सामने जब जवानी चल पड़ेगी बांधकर सर पर क़फ़न कौन फिर आएगा उसके फ़ैसले के सामने हिम्मतों ने ताक पर रखे ज़माने के उसूल ताश के घर कब...
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