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उस घड़ी

आप संग गुज़रे लम्हे, पीड़ा अजानी हो गये प्यार के रंगीन पल, क़िस्से-कहानी हो गये हर किसी के ख़्वाब जब से आसमानी हो गये पाप के और पुण्य के तब्दील मआनी हो गये एक दीवाने से झोंके ने उन्हें छू भर लिया और उनकी चूनरी के रंग धानी हो गये सर्द था मौसम तो बहती धार भी जम-सी गयी धूप...

वसंत (दो चित्र)

परेशानियों में यदि उलझा हो अंतस् तो कैसा लगता है ये वसंत मत पूछिये एक-एक दिन एक युग लगता है; और कैसे होता है युगों का अंत मत पूछिये प्रेमगीत शोर लगते हैं और लिपियों के चुभते हैं कितने हलन्त मत पूछिये जल विच कमल सरीख़ा लगता है मन काहे बनता है कोई सन्त मत पूछिये धरती के...

अर्थ बदल के देख

सूरज जैसा जल के देख सोच में मेरी ढल के देख मुझसे तेज़ निकल के देख अपनी सोच बदल के देख हाला तेरे अंतस् की यहाँ-वहाँ न छलके देख अगुआई क्या होती है मेरे आगे चल के देख फिर से तेरी बात चली फिर से आँसू ढलके देख राम लिखा और तैर गए पत्थर होकर हल्के देख पायल मौन चली आई होंठ...
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