+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

पनिहारी

पानी भरने को पनिहारी पनघट चली मटकिया मटकती कटि में दबात है गोरी के बदन की छुअन ऐसी मदभरी मदहोश गगरिया झूम-झूम गात है अंग-अंग में सुगन्ध ता पे मतवारी चाल मोरनी भी नत है, हिरनिया भी मात है चूम-चूम पतली कमरिया गुजरिया की गगरिया गोरी संग ठुमका लगात है क्वारी पनिहारी लिए...

मौन

भले ही कभी बाँहों में भरकर दुलारा न हो मुझे आपके नेह ने! …लेकिन फिर भी न जाने क्यों काटने को दौड़ता है आपका मौन! ✍️ चिराग़...

स्वतन्त्रता

मन के मलंग मतवाले महानायकों की कुर्बानियों का परिणाम है स्वतन्त्रता स्वर की बुलन्दियों ने जो अदालतों में किया क्रान्ति का वो दिव्य यशगान है स्वतन्त्रता शहीदों ने भूख-प्यास सह के बचाया जिसे भारती का वही स्वाभिमान है स्वतन्त्रता लाल-बाल-पाल औ सुभाष जैसे ऋषियों की साधना...

आदमी मायूस होता है

हवस की राह चलकर आदमी मायूस होता है सदा आपे से बाहर आदमी मायूस होता है कभी मायूस होकर आदमी खोता है उम्मीदें कभी उम्मीद खोकर आदमी मायूस होता है न हो उम्मीद तो मायूसियाँ छू भी नहीं सकतीं हमेशा आरज़ू कर आदमी मायूस होता है हज़ारों ख्वाब बेशक़ बन्द ऑंखों में पलें लेकिन पलक...
error: Content is protected !!