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पुल बनाओ तो सही

पुल बनाओ तो सही इस फ़ासले के सामने मुश्क़िलें ख़ुद हल बनेंगीं मसअले के सामने आंधियाँ राहों में बिछ जाएंगीं सजदे के लिए आसमां छोटा पड़ेगा हौसले के सामने जब जवानी चल पड़ेगी बांधकर सर पर क़फ़न कौन फिर आएगा उसके फ़ैसले के सामने हिम्मतों ने ताक पर रखे ज़माने के उसूल ताश के घर कब...

गुमान के असर से बचा

चलो किसी तरह मैं मुश्क़िले-सफ़र से बचा ख़ुदा मुझे तू अब गुमान के असर से बचा इन आइनों के सामने से ज़रा बच के निकल तू अपने आप को ख़ुद अपनी भी नज़र से बचा अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे तो अपने मुल्क़ को इस आग की ख़बर से बचा ये दुनिया हर किसी पे उंगलियाँ उठाती है तू अपनी सोच को...

संतोष

सिर्फ़ मकरन्द बन के जी लेंगे हम तेरी गन्ध बन के जी लेंगे ज़िन्दगी चाक़ हो गई तो क्या हम भी पैबन्द बन के जी लेंगे ✍️ चिराग़...

सरस्वती वंदना

जगती को वरदान ये, दीजे माँ वागीश हर इक दीपक को मिले, सूरज से आशीष ✍️ चिराग़ जैन
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