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बचपन नहीं जाता

अगर कुछ शोख़ियों की ओर उसका मन नहीं जाता तो फिर इंसान के मन से कभी बचपन नहीं जाता कोई कितना भी ख़ुद को सख्त दिल कहता रहे लेकिन कभी यादों से पहले प्यार का सावन नहीं जाता भले ही मिट गया दीवार का नामो-निशां भी अब मगर मेरे ज़ेह्न से वो बँटा आंगन नहीं जाता चुभन ही क्यों बहुत...

पाप

सिर्फ़ मतलब के लिए हर चाल चलना पाप है हर दफ़ा दर देखकर मजहब बदलना पाप है शाइरी, दीवानगी, नेकी, इबादत, मयक़शी और राहे-इश्क़ में गिर कर संभलना पाप है काश बच्चों की तरह हालात भी ये जान लें ख़्वाहिशों की तितलियों के पर मसलना पाप है दौर इक ऐसा भी था, जब झूठ कहना मौत था और अब...

लहर

ग़रीबों के बच्चों की भूखी आँखों में पलते कोरे स्वप्न अनायास ही मिट जाते हैं सागर-तट पर फैली रेत पर लिखे नाम की तरह। रेतीली चित्रकारी को मिटाने आयी लहर हर बार दे जाती है एक नया चित्र सागर के तट को ताकि व्यर्थ न हो यात्रा भविष्य में आनेवाली लहर की! ✍️ चिराग़...

बचपन

हँसी-ख़ुशी के वो लमहे हज़ार बचपन के कभी तो लौटते दिन एक बार बचपन के नहीं, दिमाग़ न थे होशियार बचपन के तभी तो दिन थे बहुत ख़ुशगवार बचपन के बड़े हुए तो बहुत लोग मिल गए लेकिन बिछड़ चुके हैं सभी दोस्त-यार बचपन के जो जिस्म को नहीं दिल को सुक़ून देते थे बहुत अजीब थे वो रोज़गार बचपन...

इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...
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