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बीत गया एक और साल

सपनों की नौका है, अपनों का पाल जीवन की धारा पर, साँसों की चाल बीत गया एक और साल भोर की किरण आई, अर्घ्य बन गया पानी दोपहर तपी, लेकिन शाम हो गई धानी रात ने बिखेर दिया तारों का थाल बीत गया एक और साल देह हो गई गठरी, शीत की गलन झेली पानी को छू-छूकर, ग्रीष्म की जलन झेली...

फ़ुरसत

उफ़्फ़ ये फ़ुरसत है कि मिलती ही नहीं है मुझसे एक मुद्दत से मेरे पास नहीं आई है एक मुद्दत से कई काम अधूरे हैं मेरे वायदे, ख़्वाब, मुलाक़ातें कई हैं बाक़ी एक तस्वीर अधूरी सी बनी रक्खी है एक मिसरा-सा ग़ज़ल का है, बिना सानी के एक किस्से का भी मफ़हूम लिखा रक्खा है एक बूढ़ा है, कई...

देख ले इक बार तो मुड़कर

छोड़ कर घर-द्वार मत जा आस के उस पार मत जा राग मत बैराग से कर नेह को यूँ हार मत जा घर बिना तेरे यकायक हो गया खंडहर देख ले इक बार तो मुड़कर विश्व को रौशन बनाने के लिए सूरज बहुत है बाहरी दीवार पर उजियार की सजधज बहुत है घर समूचा डूब जाता है अंधेरे में तेरे बिन इस अभागी...

आरोपी और अपराधी

आरोपी और अपराधी में क्या अंतर होता है; यह समझने के लिए विवेक का जागृत होना आवश्यक है। उन्माद विवेक की हत्या करके जन्म लेता है। उन्माद भीड़ का मूल स्वभाव है। हमारी राजनीति हमें नागरिकों से जनता और जनता से भीड़ बनाने में तो सफल हो ही गई है। जब लिंचिंग और एनकाउंटर जैसे...

न्याय व्यवस्था

बलात्कार जैसे अपराध के अपराधी के प्रति पूरा देश घृणा से भरा है। मनुष्य की खाल में छिपे दैत्यों को उनकी करनी का कठोर से कठोर दण्ड मिलना ही चाहिए। हैदराबाद में पुलिस ने केवल उन चार दरिंदों को ही नहीं मारा है, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था की लचर प्रवृत्ति के मुँह पर भी...
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