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भाजपा की चुनावी रणनीति

जब खेलन देनउ नाय तो हाय जे खेल को ड्रामा काइं करनौ बैटिंग करनेवालन के बल्ले ही तोड़ दए हैं रन लेनेवालन के दोनूं जूते जोड़ दए हैं सीमा कू चर गई गाय आय हाय जे खेल को ड्रामा काइं करनौ कैसे फेंकें गेंद समूची पिच ही खोद रखी है अपनी तीनों किल्ली तुमने भगवा पोत रखी हैं भगवा...

मनमोहन सिंह के बयान पर सियासत

जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया उन्हीं का बयान ले उड़े पहले तुमको निहत्था बताया फिर हाथ से कमान ले उड़े कहने भर को पीएम थे पर बोल न पाए मनमोहन हाथ हिलाना दूर, होंठ तक खोल न पाए मनमोहन अपने ही घर में प्रतिभा का मोल न पाए मनमोहन अपना ऑर्डिनेंस फटने पर डोल न पाए मनमोहन...

भाजपा और चुनाव

केलकूलेटर ने भी पकड़े हैं कान ये जादू मन्तर कैसे सीखा कहीं मिलते नहीं हाथों के निशान ये जादू मन्तर कैसे सीखा नगालैंड में ख़ुद प्रत्याशी वोट न करने आता त्रिपुरा में वोटिंग पर्सेंटेज सौ से ऊपर जाता सौ पर्सेंट से भी ज़्यादा मतदान ये जादू मन्तर कैसे सीखा प्रत्याशी के...

अरुण जैमिनी: एक नाम नहीं, एक किरदार

“छोड़ ना यार, क्या फरक पड़ता है।” -यह वाक्य कोरा तकियाक़लाम ही नहीं, अपितु अरुण जी के जीवन का मूल सिद्धान्त भी है। जीवन की बड़ी से बड़ी भँवर से भी वे इसी एक वाक्य की डोर थामकर किनारे आ लगते हैं। पहले मुझे ऐसा लगता था कि वे दूसरों की समस्या को छोटा समझते हैं, इसीलिए...

माहेश्वर तिवारी: गीत का उदाहरण

एक सम्पूर्ण गीत को यदि मनुष्य बना दिया जाए तो उसका आचार-व्यवहार लगभग माहेश्वर दा जैसा होगा। संवेदना में डूबकर तरल हो उठी आँखें उनके गीतकार नहीं, ‘गीतमयी’ होने का प्रमाण थीं। आज वे आँखें हमेशा के लिए बंद हो गईं। मृदु वाणी किसे कहते हैं, इसका उदाहरण आज हमसे...
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