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दिल खोलकर…

अपने रोग का संज्ञान होने से लेकर अब तक की यात्रा में जो कुछ जीवन सीखने का अवसर मिला, उसके लिए यह सारा कष्ट बड़ा मोल नहीं है। पहली बार पता लगा कि लोगों की धूर्तता ही नहीं, बल्कि उनकी सहृदयता पर भी एक आवरण चढ़ा होता है, जो ऐसे ही समय में अनावृत होता है। मोर्चे पर खड़े...

नवजीवन

सबकी नज़र पीर से सूखी, मेरी नज़र ख़ुशी से नम है जिसको सबने घाव कहा है, वह नवजीवन का उद्गम है क्या सोचा था, शाख कटेगी तो मैं माली को कोसूंगा जो छिल-छिलकर क़लम बन गयी, मैं उस डाली को कोसूंगा जिसके दम पर पूरा गुलशन स्वस्थ रहा है, पुष्ट रहा है क्या सोचा था, इस गुलशन की उस...

स्वयं का प्रसव

ऐसा लगता था सब राहें अब इसके आगे धूमिल हैं जो भी है, जितनी भी है; बस यह ही जीवन की मन्ज़िल है लेकिन घबराकर हिम्मत की हत्या करना ठीक नहीं था जब तक मौत नहीं आ जाती, तब तक मरना ठीक नहीं था जाने कौन घड़ी, अगले पल जीवन को लाचार बना दे जाने कौन घड़ी, पल भर में हर भय का उपचार...

यात्रा

अब तक पथ पर फूल बिछे थे नयन लुभावन चित्र खिंचे थे अब इक कंकड़ चुभ जाने से, मैं रस्ते को दोष न दूंगा जिस क्यारी को हाथ लगाया, उसमें फूल खिले; क्या कम है? जिस पगडण्डी को अपनाया, उस पर मीत मिले; क्या कम है? रेले-मेले, खेल-तमाशे, उत्सव के पल पाये यहाँ से अब कुछ सन्नाटा...

दिल की डायरी

दिल में काफी बड़ा घोटाला पकड़ा गया है। जिस विभाग को शरीर में ख़ून वितरित करने का उत्तरदायित्व दिया गया था, वह पिछले 36 वर्ष से कुछ रक्त बचाकर दिल के भीतर फेंकता रहा है। इस भ्रष्टाचार की वजह से दिल का पूरा तंत्र कमज़ोर होता रहा और अब वह अपनी क्षमता का एक-चौथाई काम ही कर...
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