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आचार्य विद्यासागर की समाधि

सभी का मन सशंकित हो रहा था बहुत दिन से कहीं कुछ खो रहा था जुड़े सब हाथ ढीले पड़ गए थे पनीले नेत्र पीले पड़ गए थे तपस्या चरम तक आने लगी थी ये भौतिक चर्म कुम्हलाने लगी थी व्रतों पर नूर इतना चढ़ गया था कि तन का रंग फीका पड़ गया था हुई जर्जर तपस्यायुक्त काया तो यम...

विदा आचार्य श्री

आज संतत्व का एक उदाहरण साकार से निराकार हुआ है। आज तपश्चर्या का एक बिम्ब अंतर्धान हुआ है। निश्छल दिगंबरत्व की एक गाथा का पटाक्षेप हुआ है। आज आस्था और विवेक के एक अद्वितीय संगम की समाधि हुई है। आध्यात्मिक ऊर्जा के विराट केंद्र का स्थानांतरण हुआ है। आचार्य श्री...
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