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रिस्क

मेरे भीतर दौड़ना चाहती है इक नदी दरदरे रेगिस्तान की ओर। मस्तिष्क ने कहा- “रिस्क है इसमें।” मन बोला- “जुआ ही तो है या तो लहलहा उठेगा रेगिस्तान या दरदरा जाएगी...

संकल्प

मैं ये दावा नहीं करता कि दुनिया को बदल दूंगा मगर जो रास्ता सच का हो, उस रस्ते पे चल दूंगा मेरा अधिकार है चिंतन पे, संकल्पों पे, कर्मों पे मैं ये संकल्प लेता हूँ कि सत्कर्मों पे बल दूंगा © चिराग़...

इरादा

तेरे मन में भी इक इरादा है मेरे मन में भी इक इरादा है वक्त क़ी आंधियाँ बताएंगीं कौन मजबूत कितना ज्यादा है ✍️ चिराग़...

प्रेम के रंग से निखारो

जैसा चाहो जवाब दो इसको दुनिया ऐसा सवाल है यारो प्रेम के रंग से निखारो तो ज़िन्दगी बेमिसाल है यारो ✍️ चिराग़...

इश्क़

उम्र के इक पड़ाव पर जाकर इश्क़ सबको दुलारता होगा कभी चेहरा निहारता होगा कभी गेसू संवारता होगा ✍️ चिराग़...
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