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रामधारी सिंह दिनकर

भारत के ओज स्वरावतार जनता के मन की दृढ़ पुकार कविता के तेजस्वी सपूत वाणी में शौर्य सुधा अकूत ज्वाला से जब भर गए नेत्र शब्दों में उतरा कुरुक्षेत्र गाया करुणा की भृकुटि तान वह रश्मिरथी का महागान गीतों में सामधेनी धधकी जनहित की ज्यों दामिनी दमकी श्रृंगार रचा उर्वशी सजी...
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