Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
मेरो काट दयो चालान, हाय राम
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ
मेरी सूख रही है जान, भगवान
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ
इत कू सिगनल झपकी देवै, उतै पुलिसिया घूरै
जेब सहम कर हाथ पकड़ ले, अण्टी झूला झूलै
मेरो भटक गयो है ध्यान, भगवान
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ
जहाँ नैक गीयर बदलें वां बैरीगेट लगावैं
सड़कन पर गड्ढे ही गड्ढे, कैसे तेज चलावैं
हम उछलैं धूम-धडाम, भगवान
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ
पन्द्रह साल पुरानी लूना, कण्डम में डरवाय दई
मफलर वाले ने दिल्ली में, ईवन-आॅड लगाय दई
इक बार ही ले लो प्रान, हे राम
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
क्या करना है कारोबार
कल और इलेक्सन होंगे
कल और इलेक्सन होंगे, घनघोर इलेक्सन होंगे
हर ओर इलेक्शन होंगे, पुरजोर इलेक्शन होंगे
सब कुछ मुफ्त मिलेगा यार
कल और इलेक्सन होंगे
एमपी वाले चावल देंगे, दिल्ली वाई-फाई
पटना जाकर फोकट में ले लेंगे यार दवाई
मेहनत के मुँह पर पोतेंगे, उंगली की सब स्याही
जब उंगली से काम चले तो काहे देह हिलाई
महंगा वोटों का बाजार
कल और इलेक्सन होंगे
हर नेता में होड़ लगी है, ख़ूब लुटाओ पैसा
राजनीति में सब जायज़ है, इसमें खटका कैसा
भैंस उसी की, जिसने अपने खूंटे बांधा भैंसा
उसने ऐसी-तैसी की थी, हमने ऐसा-तैसा
जी भर जीमो बिना डकार
कल और इलेक्सन होंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose, Quotation
यही हाल रहा तो कुछ दिन बाद अरविन्द भैया अपने मफलर को साड़ी के पल्लू की तरह पतलून में खोंस कर हाथ हिला हिला कर बोलेंगे- “हाय या के कीड़े पड़ें…..याको नास जाय… मेरौ जीनौ हराम कार्राखो है। जाय आफत पररई है। जे ना मानैगा …छोरा दामोदर का। हाय लगेगी मेरी हाय… मेरी आत्मान तैं हाय निकलेगी रे….!”
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Prose, Quotation, Unpublished
सत्ता से चूक गए राजनेता की ईमानदारी उस चरित्रवती जवान विधवा की तरह है जिससे लताड़ खाने के बाद हर लौंडा कहता फिरता है- “खेत में हाथ पकड़ कर मो ते लिपट रही हती छिनाल, मैं धक्का दई के भाज आयो।”
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
काऊ ने भोग लिए मन के सुख, काऊ ने देह के रोग कमाए
दौलत में सुख खोजने वालों ने केवल भौतिक भोग कमाए
काऊ ने प्रेम में जीते नारायण, काऊ ने मात्र वियोग कमाए
जीवन सिर्फ़ उन्होंने जिया, जिनने जग में कुछ लोग कमाए
✍️ चिराग़ जैन