+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

मेरो आज सकूटर बिक जायगौ

मेरो काट दयो चालान, हाय राम
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ
मेरी सूख रही है जान, भगवान
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ

इत कू सिगनल झपकी देवै, उतै पुलिसिया घूरै
जेब सहम कर हाथ पकड़ ले, अण्टी झूला झूलै
मेरो भटक गयो है ध्यान, भगवान
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ

जहाँ नैक गीयर बदलें वां बैरीगेट लगावैं
सड़कन पर गड्ढे ही गड्ढे, कैसे तेज चलावैं
हम उछलैं धूम-धडाम, भगवान
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ

पन्द्रह साल पुरानी लूना, कण्डम में डरवाय दई
मफलर वाले ने दिल्ली में, ईवन-आॅड लगाय दई
इक बार ही ले लो प्रान, हे राम
मेरो आज सकूटर बिक जायगौ
✍️ चिराग़ जैन

इलेक्सन

क्या करना है कारोबार
कल और इलेक्सन होंगे
कल और इलेक्सन होंगे, घनघोर इलेक्सन होंगे
हर ओर इलेक्शन होंगे, पुरजोर इलेक्शन होंगे
सब कुछ मुफ्त मिलेगा यार
कल और इलेक्सन होंगे

एमपी वाले चावल देंगे, दिल्ली वाई-फाई
पटना जाकर फोकट में ले लेंगे यार दवाई
मेहनत के मुँह पर पोतेंगे, उंगली की सब स्याही
जब उंगली से काम चले तो काहे देह हिलाई
महंगा वोटों का बाजार
कल और इलेक्सन होंगे

हर नेता में होड़ लगी है, ख़ूब लुटाओ पैसा
राजनीति में सब जायज़ है, इसमें खटका कैसा
भैंस उसी की, जिसने अपने खूंटे बांधा भैंसा
उसने ऐसी-तैसी की थी, हमने ऐसा-तैसा
जी भर जीमो बिना डकार
कल और इलेक्सन होंगे
✍️ चिराग़ जैन

लाॅकडाउन

ससुरे दफ़्तर है गए बन्द
घर पर बैठे मूसरचन्द
घर पर मूसरचन्द
खाली हो गए सबरे फंड

देसी घी के परठाँ में भी कमी बताने वारे
साँझ-सबेरे लूखी रोटी चाब रहे बेचारे
भूल गए रबड़ी श्रीखण्ड
घर पर बैठे मूसरचन्द
घर पर मूसरचन्द
खाली हो गए सबरे फंड

आसपास की ग्वालिन के संग रास रचाना छूटा
कलियाँ सबरी ग़ायब है गई, भँवरे का दिल टूटा
कलियन को बन गौ गुलकंद
घर पर बैठे मूसरचन्द
घर पर मूसरचन्द
खाली हो गए सबरे फंड

बीड़ी भई पराई, दारू हुई पहुँच से दूर
सूख-सूख कर भए छुआरे, रस से भरे खजूर
सबका ठंडा हुआ घमंड
घर पर बैठे मूसरचन्द
घर पर मूसरचन्द
खाली हो गए सबरे फंड

✍️ चिराग़ जैन

बिरहन का सवैया

ऐसी दारी की आई बीमारी अबै, सब देस के आँगन-द्वार बंधे हैं
कौन गली भर्तार बंधे, काऊ खोह में सोलह सिंगार बंधे हैं
इत गाय के मौह पे छीको बंधो, उत खूटे पे दूर बिजार बंधे हैं
जमुना जी के पार फँसी बंसुरी, अरु ओंठ मुए इस पार बंधे हैं

✍️ चिराग़ जैन

या के कीड़े पड़ें

यही हाल रहा तो कुछ दिन बाद अरविन्द भैया अपने मफलर को साड़ी के पल्लू की तरह पतलून में खोंस कर हाथ हिला हिला कर बोलेंगे- “हाय या के कीड़े पड़ें…..याको नास जाय… मेरौ जीनौ हराम कार्राखो है। जाय आफत पररई है। जे ना मानैगा …छोरा दामोदर का। हाय लगेगी मेरी हाय… मेरी आत्मान तैं हाय निकलेगी रे….!”

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!