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परिंदों का सिहर जाना अचानक किसी आहट से डर जाना अचानक तुम्हारा लौट कर जाना अचानक नई ख़ुशियों का मर जाना अचानक कई दिन से जो मन में उठ रही थी उस आंधी का गुज़र जाना अचानक अचानक ज़िन्दगी से जा रहे हो कभी हो पाए तो आना, अचानक ✍️ चिराग़...

कहानी

शब्दशः याद है मुझे डाकू खड्गसिंह घोड़ा सुल्तान बाबा भारती घोड़ा चुराने की धमकी बाबा का भय खड्गसिंह की चाल ग़रीब का वेष बनाना घोड़ा छीनना बाबा का उसे टोकना… सुनो! इस घटना का ज़िक्र किसी से मत करना वरना लोग छोड़ देंगे मजबूरों की सहायता करना। यहाँ तक की कहानी रोज़ देखता...

नई कविता

अजीब सी पशोपेश में रहता हूँ आजकल तुम और कविता दोनों ही मांगती हैं वक़्त! मैं घण्टों बतियाता हूँ तुमसे और भीतर ही भीतर घुटती रहती है कविता। आज अचानक पूछ लिया तुमने- “क्या बात है बहुत दिनों से कोई नई कविता नहीं सुनाई?” मैंने कहा- “कल सुनाऊंगा। आज ही...

अलसाए झरोखों से

पल-पल भारी होती पलकों के अलसाए झरोखों से पढ़ ही लेता हूँ देर रात मोबाइल स्क्रीन पर आया तुम्हारा नाम! करवट बदलकर निंदियारी आँखें पहुँच ही जाती हैं उंगलियों के सहारे इनबाॅक्स तक! …देर तक पढ़ता हूँ मैसेज में लिखे दो छोटे-छोटे शब्द। भुजपाश में जकड़े तकिए पर ठुड्डी...
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