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प्रवृत्ति

मिट्टी में क्षमता होती बीज की प्रवृत्ति बदलने की तो एक ही गुरुकुल में एक ही गुरु से पढ़कर सभी शिष्य युधिष्ठिर बन जातेे कोई दुर्योधन न बना होता ✍️ चिराग़...

पराश्रित प्रतिभा

द्रुपद से प्रतिशोध की आकांक्षा रखनेवाले द्रोण जब आश्रम की शुचिता में राजनीति का हस्तक्षेप स्वीकार कर लेते हैं तब केवल कुछ कर्ण और एकलव्य ही अन्याय का दंश झेलते हैं। किन्तु यदि कोई प्रतिभाशाली कर्ण किसी भी परिस्थिति में अपनी निष्ठा के अश्व किसी दुर्योधन के द्वार पर...

धैर्य

हे अर्जुन, सूर्यास्त को देखकर न धैर्य छोड़ो, न धनुष; हो सकता है सूर्य गया हो जयद्रथ को बुलाने! ✍️ चिराग़...

अज्ञातवास

राज्य, वैभव और निज पहचान तक से हाथ धोकर चल दिये पाण्डव स्वयं के शौर्य से अज्ञात होकर वीरता के उपकरण को गौण रहना है शक्ति को अब होंठ सीकर मौन रहना है भाग्य ने क्या खेल खेला है विवशता के पलों में सूख जाने की अनोखी खलबली है बादलों में शस्त्र, जिनको प्राप्त करने के लिए...

कृष्ण का तो चक्र भी ‘सुदर्शन’ है

नंदलला, कन्हैया, कान्हा, गिरिधर, मुरलीधर, गोपाल, मोहन, गोविन्द, मधुसूदन, केशव, रणछोड़, माधव, श्याम, वासुदेव, पीताम्बर… और भी दर्जनों संज्ञाएँ मिलकर थोड़ी-थोड़ी झलक भर दे पाती हैं एक कृष्ण की। और ये सब संज्ञाएँ कृष्ण के नाम भर नहीं हैं, अपितु ये सब नाम कृष्ण के जीवन...
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