धैर्य
हे अर्जुन,
सूर्यास्त को देखकर
न धैर्य छोड़ो,
न धनुष;
हो सकता है
सूर्य गया हो
जयद्रथ को बुलाने!
✍️ चिराग़ जैन
Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
हे अर्जुन,
सूर्यास्त को देखकर
न धैर्य छोड़ो,
न धनुष;
हो सकता है
सूर्य गया हो
जयद्रथ को बुलाने!
✍️ चिराग़ जैन
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