+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी
कुछ मुंडेरों के मुक़द्दर में चमेली आ गयी

पैर भी सुस्ता लिये, आँखों ने भी दम ले लिया
ज़िंदगी की राह में, दिल की हवेली आ गई

झाँकता है हर कोई ऐसे दिल-ए-नाशाद में
जैसे आंगन में कोई दुल्हन नवेली आ गई

बोझ कंधों का उतर कर गिर गया जाने कहाँ
जब मेरे सिर पे बुज़ुर्गों की हथेली आ गई

तीरगी का ख़ौफ़, सन्नाटे की दहशत थी मगर
इक किरण सूरज की धरती पर अकेली आ गयी

✍️ चिराग़ जैन

सावन

घन, पंछी, बरखा करें, गर्जन, कलरव, सोर
हृदय मयूरा झूमिहै, ज्यों सावन में मोर

जब मेघन का नेह जल, बरसत है चहुँ ओर
इस प्रेमी मन भीगता, उत बिरहन की कोर

✍️ चिराग़ जैन

सीधे प्रसारण की तरह

जीत आए जब हर इक मुश्क़िल इलेक्शन की तरह
तब मिले हैं आप भी बाहरी समर्थन की तरह

अब तो फ़रमाइश भी बतलाते हैं ज्ञापन की तरह
हो गए बच्चे सभी धरने-प्रदर्शन की तरह

पहले हर रिश्ते पे मर्यादा का सेंसर बोर्ड था
आज सब कुछ चल रहा सीधे प्रसारण की तरह

झूठ ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ बनकर छा रहा है हर तरफ़
और सच ग़ायब हुआ है दूरदर्शन की तरह

अब तो बातों का न कोई आदि है ना अंत है
लोग बातें कर रहे हैं कालचिंतन की तरह

✍️ चिराग़ जैन

कोई बिछड़कर मिला है

जहां तुमको बस एक पत्थर मिला है
वहां हमको जन्नत का मंज़र मिला है

उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है
मुक़द्दर में जिसको तेरा दर मिला है

हुआ एक मुद्दत के बाद आज तन्हा
लगा जैसे कोई बिछड़कर मिला है

✍️ चिराग़ जैन

ख़ुशी का रहा इंतज़ार

हमारा दिल था बहुत बेक़रार बरसों तक
किसी ख़ुशी का रहा इंतज़ार बरसों तक

जो एक पल तमाम दर्द को भुला देगा
उसी की आस पे थे ख़ुशगवार बरसों तक

वो मुझसे रू-ब-रू हैं, जिनका मुंतज़िर था मैं
ये पल करेगा मुझे अश्क़बार बरसों तक

तमाम मयक़दों का सारा नशा बेमानी
वो देख लें तो न उतरे ख़ुमार बरसों तक

ये क्या तिलिस्म किया तुमने इक दफ़ा छूकर
ख़याले-वस्ल रहा बरक़रार बरसों तक

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!