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होली

सबके जीवन में भरें पावनता के रंग
ऐसी रंगत लाए अब, होरी अपने संग

अब ऐसे मनने लगा, होली का त्यौहार
चेहरे स्याह-सफेद हैं, रंगे हुए अख़बार

भूले से भी मत करो, पॉवर का मिस-यूज़
भस्म हो गई होलिका, उड़ा पाप का फ्यूज़

✍️ चिराग़ जैन

मेहमानों का आना-जाना

वो, जिनके घर मेहमानों का आना-जाना होता है
उनको घर का हर कमरा, हर रोज़ सजाना होता है
जिस देहरी की किस्मत में स्वागत या वंदनवार न हो
उस चौखट के भीतर केवल इक तहख़ाना होता है

✍️ चिराग़ जैन

उस घड़ी

आप संग गुज़रे लम्हे, पीड़ा अजानी हो गये
प्यार के रंगीन पल, क़िस्से-कहानी हो गये

हर किसी के ख़्वाब जब से आसमानी हो गये
पाप के और पुण्य के तब्दील मआनी हो गये

एक दीवाने से झोंके ने उन्हें छू भर लिया
और उनकी चूनरी के रंग धानी हो गये

सर्द था मौसम तो बहती धार भी जम-सी गयी
धूप पड़ते ही मरासिम पानी-पानी हो गये

वक़्त की हल्की-सी करवट का तमाशा देखिये
ये सड़क के लोग कितनी खानदानी हो गये

मुफ़लिसी में जिनकी बातें गालियाँ बनकर चुभीं
दौलतें बरसीं तो उनके और मआनी हो गये

आपसे मिलकर हमारे दिन हुए गुलदाउदी
आपको छूकर तसब्बुर रातरानी हो गये

जब उचककर आपने तोड़ी निम्बोली; उस घड़ी
नीम के पत्ते भी सारे ज़ाफ़रानी हो गये

✍️ चिराग़ जैन

अर्थ बदल के देख

सूरज जैसा जल के देख
सोच में मेरी ढल के देख

मुझसे तेज़ निकल के देख
अपनी सोच बदल के देख

हाला तेरे अंतस् की
यहाँ-वहाँ न छलके देख

अगुआई क्या होती है
मेरे आगे चल के देख

फिर से तेरी बात चली
फिर से आँसू ढलके देख

राम लिखा और तैर गए
पत्थर होकर हल्के देख

पायल मौन चली आई
होंठ खुले साँकल के देख

याद, मुहब्बत, ख़्वाब, ख़याल
कितने रूप ख़लल के देख

शब्द बदलना छोड़ ‘चिराग़’
अब तू अर्थ बदल के देख

✍️ चिराग़ जैन

अंधानुकरण

कजरी, गारी, फाग, जोगीरे भूल गए
बंसी, तबले, ढोल, मंझीरे भूल गए
इतनी तेज़ी से दुनिया की ओर बढ़े
अपने घर को धीरे-धीरे भूल गए

✍️ चिराग़ जैन

आज़माइश

यहाँ चलता नहीं दस्तूर कोई भी ज़माने का
ग़ज़ब है लुत्फ़ इन राहों पे सब कुछ हार जाने का
नज़र मिलते ही दिल काबू से बाहर जान पड़ता है
मुहब्बत में कहाँ मिलता है मौक़ा आज़माने का

✍️ चिराग़ जैन

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