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हमारा दिल था बहुत बेक़रार बरसों तक
किसी ख़ुशी का रहा इंतज़ार बरसों तक

जो एक पल तमाम दर्द को भुला देगा
उसी की आस पे थे ख़ुशगवार बरसों तक

वो मुझसे रू-ब-रू हैं, जिनका मुंतज़िर था मैं
ये पल करेगा मुझे अश्क़बार बरसों तक

तमाम मयक़दों का सारा नशा बेमानी
वो देख लें तो न उतरे ख़ुमार बरसों तक

ये क्या तिलिस्म किया तुमने इक दफ़ा छूकर
ख़याले-वस्ल रहा बरक़रार बरसों तक

✍️ चिराग़ जैन

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