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ग़रीबी

रुके आँसू, दबी चीखें, बंधी मुट्ठी, भिंचे जबड़े
इन्हीं के तर्जुमे से मुल्क़ में विस्फोट होता है
ये बम रखने का काम अच्छा-बुरा औरों की ख़ातिर है
ग़रीबी के लिए तो सिर्फ़ सौ का नोट होता है
✍️ चिराग़ जैन

ख़ुशियों की तस्वीर

मन के आंगन में मुस्कानों की जागीर बनानी है
अपने ही हाथों से ख़ुद अपनी तक़दीर बनानी है
हम कुछ रंग चुरा लाए हैं ख़ुशियों के गुलदस्ते से
इन रंगों से हमको जीवन की तस्वीर बनानी है
✍️ चिराग़ जैन

बेमतलब का डर

तेरा अहसास मेरे दिल में ही पलता रहा बरसों
बयाने-दिल किसी डर से यूँ ही टलता रहा बरसों
तेरा दिल भी मेरी ख़ामोशियों को कोसता होगा
मेरे दिल को भी बेमतलब का डर खलता रहा बरसों

✍️ चिराग़ जैन

बहाना अनबन का

तू मेरे मन भा जाए या मैं तेरे मन भा जाऊँ
तू मुझसे जुड़ता जाए या मैं तुझसे जुड़ता जाऊँ
आओ तलाशें कोई बहाना अनबन का, इससे पहले
तू मुझसे उकता जाए या मैं तुझसे उकता जाऊँ

✍️ चिराग़ जैन

बचपन नहीं जाता

अगर कुछ शोख़ियों की ओर उसका मन नहीं जाता
तो फिर इंसान के मन से कभी बचपन नहीं जाता

कोई कितना भी ख़ुद को सख्त दिल कहता रहे लेकिन
कभी यादों से पहले प्यार का सावन नहीं जाता

भले ही मिट गया दीवार का नामो-निशां भी अब
मगर मेरे ज़ेह्न से वो बँटा आंगन नहीं जाता

चुभन ही क्यों बहुत लम्बे समय तक याद रहती है
मिरे मन से वो इक पल का परायापन नहीं जाता

किसी के रूठ जाने पर जो पीछे छूट जाते हैं
बहुत दिन तक उन अपनों का अकेलापन नहीं जाता
✍️ चिराग़ जैन

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